# ब्रेन स्कैन से देखी गई तस्वीरों का बारीक पुनर्निर्माण

> Weizmann Institute के शोधकर्ताओं ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो fMRI डेटा से किसी व्यक्ति की देखी हुई चीज़ की तस्वीर बना सकता है। इसके लिए हर व्यक्ति का सिर्फ़ एक घंटे स्कैन करना पड़ता है।

Oossa · 2026-10-01 · https://oossa.com/hi/ai-tool-recreates-images-from-brain-scans-with-high-detail

Weizmann Institute of Science में Michal Irani के नेतृत्व वाली टीम ने एक AI सिस्टम बनाया है, जो ब्रेन स्कैन का विश्लेषण करके अंदाज़ा लगा सकता है कि कोई व्यक्ति क्या देख रहा है और फिर उससे मिलती-जुलती तस्वीर बना सकता है। यह सिस्टम उलटा काम भी कर सकता है: किसी तस्वीर को देखकर यह अनुमान लगा सकता है कि उससे दिमाग़ में कैसी गतिविधि होगी। इस सफलता को सितंबर 2026 में New York में हुई Cognitive Computational Neuroscience conference में पेश किया गया।

## सिस्टम कैसे काम करता है

शोधकर्ताओं ने आठ स्वयंसेवकों के fMRI डेटा से एक “decoder” को प्रशिक्षित किया। हाई-रेज़ोल्यूशन स्कैनर में रहते हुए हर स्वयंसेवक ने करीब 9,000 तस्वीरें देखीं। Decoder की दो शाखाएं हैं—एक रंगों और आकृतियों की बनावट का अनुमान लगाती है, जबकि दूसरी तस्वीर की विषयवस्तु, जैसे “केलों का एक गुच्छा”, पहचानती है। इसके बाद diffusion model—AI का एक ऐसा प्रकार जो शोरभरे पिक्सल को साफ़ तस्वीर में बदलता है—अंतिम तस्वीर बनाता है। स्कैन और तस्वीरों के सीमित युग्मित डेटा की कमी दूर करने के लिए, शोधकर्ताओं ने एक “encoder” भी प्रशिक्षित किया, जो किसी भी तस्वीर से दिमाग़ की गतिविधि का अनुमान लगाता है। इससे दोनों मॉडल एक-दूसरे को बेहतर बनाने वाले चक्र में काम कर पाते हैं।

## यह क्यों अहम है

नए decoder को किसी नए व्यक्ति से करीब एक घंटे का fMRI डेटा ही चाहिए, जबकि पहले के टूल के लिए लगभग 40 घंटे का डेटा ज़रूरी था। स्कैनिंग की लागत में प्रति घंटे $600‑$1,000 का अंतर पड़ता है। इससे यह तकनीक तंत्रिका-विज्ञान की प्रयोगशालाओं के लिए अधिक व्यावहारिक हो सकती है। आगे चलकर, यह लॉक्ड-इन सिंड्रोम से पीड़ित लोगों जैसे बोल न सकने वाले लोगों को दिमाग़ की गतिविधि को तस्वीरों में बदलकर संवाद करने में मदद कर सकती है।

## तथ्य

- यह टूल सितंबर 2026 में New York में हुई Cognitive Computational Neuroscience conference में पेश किया गया।
- Decoder को आठ स्वयंसेवकों के स्कैन से प्रशिक्षित किया गया; हर स्वयंसेवक ने करीब 9,000 तस्वीरें देखीं।
- नए व्यक्ति के लगभग एक घंटे के fMRI डेटा के बाद यह तस्वीरों का पुनर्निर्माण कर सकता है, जबकि पहले के तरीकों में 40 घंटे लगते थे।
- अध्ययन में इस्तेमाल किए गए हाई-रेज़ोल्यूशन fMRI के वॉक्सेल आम तौर पर करीब एक घन मिलीमीटर के होते हैं और उनमें लगभग 16,000 न्यूरॉन होते हैं।
- आमने-सामने की तुलना में नए सिस्टम ने पहले के ब्रेन-इमेज पुनर्निर्माण मॉडल से काफी बेहतर प्रदर्शन किया।

## यह क्यों मायने रखता है

तंत्रिका-विज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए स्कैनिंग में कम समय लगने का मतलब है कि अध्ययन कम खर्च में और तेज़ी से हो सकते हैं, जिससे दृश्य-प्रक्रिया पर अधिक प्रयोग करना संभव होगा। गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले लोगों के लिए यह तरीका बिना बोले विचार व्यक्त करने का भविष्य का रास्ता दिखाता है, हालांकि इसके व्यावहारिक उपकरण बनने में अभी कई साल लगेंगे।

## स्रोत और संदर्भ

1. [An AI “mind-reading” tool can reconstruct what you’re looking at based on a brain scan](https://www.technologyreview.com/2026/10/01/1145588/ai-mind-reading-reconstructs-what-youre-looking-at/) – MIT Technology Review, 2026-10-01
2. [The Download: AI “mind-reading” and creative uses for small batteries](https://www.technologyreview.com/2026/10/01/1145592/the-download-ai-mind-reading-small-batteries/) – MIT Technology Review, 2026-10-01

अंतिम अपडेट: 2026-10-01
