OpenAI ने हाल ही में 722 पांडुलिपियां प्रकाशित कीं, जिनमें लंबे समय से अनसुलझी गणितीय समस्याओं के AI से तैयार समाधान हैं। ये शोधपत्र पिछले हफ्ते सार्वजनिक किए गए। गणितज्ञों का कहना है कि इतने सारे नतीजों की जांच में सालों लग सकते हैं। उन्हें यह भी चिंता है कि स्पष्ट तर्क न होने से इस काम को आगे बढ़ाना कठिन होगा।
गणित समुदाय क्यों चिंतित है
इन प्रमाणों को तैयार करने वाले AI मॉडल का नाम नहीं बताया गया है, लेकिन विश्लेषक पहले ही दावों की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई समाधान सवाल से सीधे अंतिम जवाब पर पहुंच जाए और बीच के चरण न बताए, तो उससे बहुत कम जानकारी मिलती है। नतीजा कैसे निकला, यह जाने बिना शोधकर्ता नए सिद्धांत विकसित नहीं कर सकते और न ही इन निष्कर्षों को आगे के काम की बुनियाद बना सकते हैं।
यह क्यों मायने रखता है
गणितीय शोध पर निर्भर छात्रों, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के लिए, बिना पुष्टि वाले प्रमाणों की अचानक आई बड़ी संख्या प्रगति धीमी कर सकती है, क्योंकि हर नतीजे की इंसानों को विस्तार से जांच करनी पड़ सकती है। इससे यह सवाल भी उठता है कि AI से मिली खोजों पर भरोसा कैसे किया जाएगा और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों में उनका इस्तेमाल कैसे होगा।