30 सितंबर, 2026 को अमेरिकी सीनेट ने Ratepayer Protection Act के खिलाफ 57-43 से मतदान किया। आगे बढ़ने के लिए विधेयक को 60 वोट चाहिए थे, लेकिन उसे तीन वोट कम मिले। दो सप्ताह पहले प्रतिनिधि सभा इसे पारित कर चुकी थी, इसलिए राष्ट्रपति Donald Trump के हस्ताक्षर से कानून बनने से पहले सीनेट आखिरी बाधा थी।
विधेयक से क्या होता
इस प्रस्ताव का मकसद AI-केंद्रित डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार से बिजली की दरें बढ़ने पर आम उपभोक्ताओं को बचाना था। इसके तहत इन केंद्रों की अतिरिक्त बिजली मांग पूरी करने के लिए बिजली कंपनियां दरें कितनी बढ़ा सकती हैं, इस पर सीमा लगाने की कोशिश की गई थी। समर्थकों का कहना था कि AI के कामकाज का दायरा बढ़ने के साथ इससे बिजली बिलों में “बेतहाशा” बढ़ोतरी रोकी जा सकेगी।
आगे क्या और कौन-से सवाल बाकी
सीनेट में मतदान के बाद फिलहाल यह विधेयक आगे नहीं बढ़ेगा। सांसदों ने यह नहीं बताया है कि वे बाद में ऐसा ही कोई दूसरा प्रस्ताव फिर से पेश करने की कोशिश करेंगे या नहीं। इस बीच, बिजली कंपनियां और डेटा सेंटर संचालक विस्तार की योजनाएं बना रहे हैं, जबकि घरों के बिजली बिलों पर इसका असर अभी अनिश्चित है।
यह क्यों मायने रखता है
एक आम गृहस्वामी के लिए, विधेयक के हारने का मतलब है कि नए AI डेटा सेंटरों के कारण बिजली बिल में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है, इसे सीमित करने वाला कोई नया संघीय नियम नहीं है। ऐसी सुरक्षा के बिना, भविष्य में दरें बढ़ेंगी या नहीं, यह राज्य के नियामकों और बिजली कंपनियों पर निर्भर करेगा। इस मुद्दे से निपटने के लिए कोई दूसरा विधेयक पेश होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।