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अध्ययन: LLMs अक्सर नए चिकित्सा दिशानिर्देश लागू नहीं कर पाते

शोधकर्ताओं के मुताबिक, बड़े भाषा मॉडल नई चिकित्सा सलाह को पहचान तो लेते हैं, लेकिन उसे सही ढंग से लागू करने में अक्सर चूक जाते हैं।

लेखक: Oossa द्वारा प्रकाशित: 1 मिनट पढ़ना

Vitaly Gariev · Unsplash

23 अक्टूबर 2026 को arXiv पर प्रकाशित एक नए शोधपत्र में देखा गया है कि बड़े भाषा मॉडल (LLMs—ChatGPT जैसे टूल के पीछे काम करने वाली AI तकनीक) बदलते चिकित्सा दिशानिर्देशों के साथ कितना तालमेल रखते हैं। लेखकों ने ChronoEvo नाम का एक टेस्ट सेट बनाया, जिसमें चिकित्सा संबंधी ज्ञान में बदलाव की 12 श्रेणियों के तहत दिशानिर्देशों में किए गए 1,709 विशिष्ट संशोधन शामिल थे। उन्होंने 14 अलग-अलग LLMs से संशोधित दिशानिर्देशों के आधार पर चिकित्सकीय सवालों के जवाब देने को कहा।

परीक्षण में क्या सामने आया

अध्ययन में मुख्य मॉडल ने 90.8% मामलों में पहचान लिया कि दिशानिर्देश में संशोधन हुआ है और 80.2% मामलों में चिकित्सकीय रूप से सही जवाब दिया। हालांकि, उसके सिर्फ 58.5% जवाबों में नई सिफारिश पूरी तरह शामिल थी। यानी बदलाव पहचानने और नए दिशानिर्देश को वास्तव में लागू करने के बीच 32.3 प्रतिशत अंकों का अंतर था। जांचे गए बाकी 13 मॉडलों में भी यही अंतर दिखा। दो चिकित्सकों ने मॉडल के 300 जवाबों की समीक्षा की और उन्हें भी ऐसी ही कमी मिली: संशोधन पहचानने और उसे पूरी तरह लागू करने के बीच 40.3 प्रतिशत अंकों का अंतर। अध्ययन के मुताबिक, जिन बदलावों से सिफारिश की मजबूती या उसके लिए पात्र मरीजों की श्रेणी बदलती है, उनके मामले में मॉडल के जवाब में पुरानी सलाह बने रहने की आशंका खास तौर पर अधिक होती है। लेखकों ने दिशानिर्देश के संशोधित हिस्से को प्रमुखता से दिखाने वाला “revision-salience” बदलाव भी आजमाया। इससे मॉडल ने पुरानी जानकारी कम दोहराई और उसके जवाबों की कुल चिकित्सकीय सटीकता बेहतर हुई, लेकिन नई सलाह को पूरी तरह शामिल करने का अंतर खत्म नहीं हुआ।

यह क्यों अहम है

AI से चिकित्सा सलाह लेने वाले डॉक्टरों या मरीजों के लिए इसका मतलब है कि नए डेटा से अपडेट मॉडल भी पुराने इलाज सुझा सकते हैं। उपयोगकर्ताओं को AI से मिली चिकित्सा सिफारिशों की पुष्टि मौजूदा आधिकारिक दिशानिर्देशों से करनी चाहिए।

यह क्यों मायने रखता है

AI टूल इस्तेमाल करने वाले डॉक्टरों और मरीजों को ऐसी सलाह से भ्रम हो सकता है जो नई दिखती है, लेकिन अब भी पुराने दिशानिर्देशों पर आधारित होती है। अध्ययन बताता है कि AI डेवलपर्स को यह सुनिश्चित करने के बेहतर तरीके खोजने होंगे कि मॉडल अपडेट को सिर्फ पहचानें नहीं, बल्कि उन्हें सही ढंग से लागू भी करें।

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Oossa · न्यूज़लेटर

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