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अध्ययन: रीमास्किंग से डिफ्यूज़न डिकोडिंग बेहतर

arXiv के एक पेपर में मास्क्ड डिफ्यूज़न जनरेशन के दौरान गलतियों को सुधारने का तरीका सुझाया गया है। इसमें लॉजिक और कोडिंग के कामों पर बेहतर नतीजे बताए गए हैं। सार में स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

संक्षिप्तलेखक: Oossa द्वारा प्रकाशित: 1 मिनट पढ़ना

शोधकर्ताओं ने Random Remask-Denoise (R²D) नाम की एक टेस्ट-टाइम विधि पेश की है, जिसमें डिनॉइज़ करने से पहले जनरेट किए गए कुछ टोकन को कभी-कभी फिर से मास्क किया जाता है। पेपर के मुताबिक, इससे मॉडल बिना फाइन-ट्यूनिंग या रिवॉर्ड फीडबैक के डिकोडिंग की गलतियों पर दोबारा काम कर सकता है। लेखकों का कहना है कि इस विधि ने मुश्किल Sudoku पहेलियों में 97% से अधिक और 3-SAT में 99% से अधिक सटीकता हासिल की। उनका यह भी कहना है कि इसने iterative-correction बेसलाइन और HumanEval+ पर LLaDA2.1-mini की आधिकारिक Q-mode सटीकता से बेहतर प्रदर्शन किया। ये नतीजे पेपर के सार में बताए गए हैं; वहां उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

यह क्यों मायने रखता है

मास्क्ड डिफ्यूज़न मॉडल पर काम करने वाले शोधकर्ता जांच सकते हैं कि रीमास्किंग से जनरेट किए गए कोड और लॉजिक के जवाब बेहतर होते हैं या नहीं। हालांकि, सार से यह साबित नहीं होता कि बताए गए परीक्षणों के बाहर भी ये नतीजे लागू होते हैं।

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Oossa · न्यूज़लेटर

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