चीन के वाणिज्य और विज्ञान मंत्रालयों ने एक मसौदा जारी किया है, जो निर्यात नियंत्रण के दायरे में आने वाली AI तकनीकों की सूची बढ़ाता है। इसमें बड़े मॉडल, एजेंट, कंप्यूट क्लस्टर और डेटा-प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर समेत 23 AI टूल शामिल हैं। ऐसे टूल, जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले मैलवेयर को अपने-आप लिख या उसमें बदलाव कर सकते हैं, उनके निर्यात पर रोक होगी। कमजोरियों का पता लगाने वाले अन्य टूल पर पूरी पाबंदी के बजाय नई सीमाएं लगेंगी।
मॉडल पर नियम कैसे लागू होंगे
दो स्थितियों में बड़े मॉडल के निर्यात पर सीमाएं लागू होंगी। पहली, अगर मॉडल को चीन के “महत्वपूर्ण डेटा” पर प्रशिक्षित किया गया हो—जिसे Data Security Law के तहत परिभाषित किया गया है—तो उस पर रोक होगी। अपवाद तभी मिलेगा जब डेटा सार्वजनिक हो, उसे साफ करके प्रशिक्षण सेट के 0.1 % से कम कर दिया गया हो, वह मॉडल के आउटपुट में कभी न आए और मुख्य तकनीकों के अनुसंधान एवं विकास को उसमें अहम योगदान न मिला हो। दूसरी, मॉडल की बुनियादी तकनीकों—वेट्स, चेकपॉइंट्स, सोर्स कोड, आर्किटेक्चर और ट्रेनिंग या इन्फरेंस के तरीकों—पर नियंत्रण लागू होगा, यदि मॉडल के कंप्यूट की क्षमता 10^26 FLOPs तक पहुंचती है, उसमें कम से कम 2 trillion पैरामीटर हैं या सार्वजनिक मूल्यांकनकर्ताओं की रैंकिंग में वह दुनिया के शीर्ष 10 में है।
किन चीज़ों की अनुमति रहेगी
API कॉल, SaaS ऐप, वेबसाइट या हल्के स्थानीय संस्करणों के ज़रिये प्रतिबंधित मॉडल का इस्तेमाल नए नियंत्रणों के दायरे में नहीं आएगा। हालांकि, उसी सॉफ्टवेयर को विदेशी सर्वरों पर चलाने के लिए निर्यात का सामान्य लाइसेंस लेना होगा। चीन ने ओपन सोर्स के तौर पर जारी AI तकनीक और विदेश में डेटा सेंटर चलाने या अंतरराष्ट्रीय सहयोग करने वाली चीनी कंपनियों के लिए तेज़ “स्वचालित लाइसेंसिंग” प्रक्रिया भी शुरू की है।
यह क्यों मायने रखता है
ओपन-वेट AI मॉडल पर निर्भर कंपनियों को घरेलू विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है या निर्यात लाइसेंस लेना पड़ सकता है, जिससे लागत और जटिलता बढ़ेगी। शोधकर्ता और डेवलपर ओपन-सोर्स रिलीज़ का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं, लेकिन विदेश में किसी भी व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए नई कागजी कार्रवाई करनी होगी।