Workhorse बनाने वाली टीम ने Unitree G1 ह्यूमनॉइड को इंसानों के नज़रिए से रिकॉर्ड किए गए वीडियो देखकर पूरे शरीर का इस्तेमाल करते हुए काम करने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने की ट्रेनिंग दी। एक विज़ुअल प्लानर धड़, कलाई और पैरों की मुद्राओं का अनुमान लगाता है, जबकि रीइन्फोर्समेंट-लर्निंग ट्रैकर उन लक्ष्यों के मुताबिक चलता है। असली रोबोट पर यह सिस्टम डिब्बे छांटता है, उछाला गया डिब्बा पकड़ता है और सूटकेस पर चढ़ता तक है। कोई व्यक्ति धक्का दे, तब भी यह संभल सकता है। सिमुलेशन में इसने 77% प्रयासों में डिब्बे छांटे और 40 N·s तक के धक्कों के दौरान 64% प्रयासों में सफल रहा।
यह क्यों मायने रखता है
अगर यह तरीका बड़े पैमाने पर कामयाब होता है, तो रोज़मर्रा के सेवा-रोबोट बिना हर काम के लिए अलग से प्रोग्राम लिखे, मुश्किल और धक्का-मुक्की वाले काम कर सकेंगे।