Anthropic का कहना है कि उसके AI एजेंट अब रोजमर्रा के काम का बड़ा हिस्सा संभाल रहे हैं। अगस्त 2026 तक एजेंटों ने हर एक मानव कर्मचारी के काम के घंटे के मुकाबले छह घंटे काम किया। कंपनी के अपने अध्ययन में इस बढ़ोतरी का संबंध जूनियर भर्तियों में तेज गिरावट से जोड़ा गया है। तकनीकी विभागों में जूनियर कर्मचारियों की हिस्सेदारी 2025 की शुरुआत से 21% से घटकर 14% रह गई, जबकि नई जूनियर भर्तियां 27% से गिरकर सिर्फ 9% पर आ गईं।
आंकड़े क्या बताते हैं
अध्ययन में अलग-अलग विभागों पर असर का ब्योरा दिया गया है। रिसर्च समूहों में AI एजेंटों ने लोगों के मुकाबले 19 गुना घंटे काम किया, जबकि प्रोडक्ट टीमों में यह अनुपात 6:1 रहा। सभी विभागों में उत्पादकता बढ़ी: इंजीनियरों ने 5.1 × ज्यादा कोड कमिट किए, डेटा वैज्ञानिकों ने 3.1 × ज्यादा क्वेरी चलाईं और कानूनी टीम ने 3.1 × ज्यादा अनुबंधों पर काम किया। सेल्स टीम ने 1.7 × ज्यादा सौदे पूरे किए और रिक्रूटर्स ने 1.4 × ज्यादा उम्मीदवारों को भर्ती किया।
यह क्यों मायने रखता है
सॉफ्टवेयर, वित्त या कानून में करियर शुरू करने की उम्मीद रखने वालों के लिए शुरुआती स्तर की नौकरियों के घटते अवसरों का मतलब हो सकता है कि नौकरी के दौरान प्रशिक्षण पाने की जगहें कम हों। Anthropic का अनुभव बताता है कि AI के नियमित काम संभालने से कंपनियों को कम जूनियर कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है। इससे भविष्य में अनुभवी पेशेवरों की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
यह क्यों मायने रखता है
अगर AI एजेंट नियमित काम संभालते रहे, तो नए स्नातकों को नौकरी के दौरान सीखने के लिए शुरुआती स्तर के कम पद मिल सकते हैं। इससे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, वित्त और कानूनी शोध जैसे क्षेत्रों में भविष्य के विशेषज्ञों की तैयारी धीमी पड़ सकती है।